थर्स्ट बियॉन्ड द हॉलो

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    भारत के पश्चिम बंगाल में आने वाला सिलीगुड़ी, लोगों के लिए एक मनमोहक और दिलकश जगह है। लेकिन इसी जगह ने अपनी मिट्टी और परछाई में कई डरावने राज छुपाए हैं — एक अनंत काली शक्ति जो पिछले कई दशकों से धीरे धीरे पनप रही है, जिसे पोषक देकर लगातार बढ़ाते आ रहे हैं लोगों के दुख, दर्द, खून, नफरत, ईर्ष्या, बदले की भावना, अपराध और घिनौने गुनाह। THIRST BEYOND THE HOLLOW एक डार्क साइकोलॉजिकल हॉरर मिस्ट्री थ्रिलर है, जहां कई किरदार अपने और अपनों के लिए संघर्ष करते हैं, लड़ते हैं, और सारी हदें पार कर जाने तक को तैयार होते हैं। पर हमेशा किसी काली बुरी शक्ति से नहीं, बल्कि इस दुनिया में राज करने वाले असल हैवानों—इंसानों से, उनके अत्याचारों से, उनके गुनाहों से, उनकी हवस, बर्बरता और उत्पीड़न से।

    जब दोस्तों के साथ अपनी सौतेली मां के घर छुट्टी पे आए रोहन को, अपनी छोटी सौतेली बहन दीक्षा पे एक क्रूर काली सत्ता, ‘एक परिजीवी’ के वाश होने का पता चलता है, तो वह उसे बचाने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हो जाता है। जिसमें उसके पग पग पर साथ खड़े रहने के लिए तैयार रहते हैं—उसके परिवार वाले, उसके दोनों भरोसेमंद दोस्त राहुल और रितेश, और उनके कॉलेज के एक अनुभवी प्रोफेसर मुकुंदन, जो अपने एक उत्कृष्ट तांत्रिक साथी गगन्थ के साथ उनका मार्गदर्शन करता है।

    नाना के मारे जाने के बाद रोहन का मकसद और भी कठिन और खतरनाक हो जाता है, जब उन्हें पता चलता है की दीक्षा को बचाने के लिए, उन्हें सिलीगुड़ी जाकर वहां पल रही उस दूसरी अनन्त हैवानी काली शक्ति का सामना करके उसे हराना होगा। जिसका पता वो अपने साथी चेतन—जो खुद एक अलौकिक शक्ति वेताल का vessel होता है—उसकी मदद से लगा लेते है। जहाँ आगे अब खतरा हर दम उनके सिर पर तलवार बनकर लटक रहा होता है।

    अपने मकसद की पहली सीढ़ी सिलीगुड़ी में उनकी मुलाकात, एक इत्तेफाक से सेवक से हो जाती है, जो खुद बांग्लादेश से अपने एक भरोसेमंद दोस्त दास के साथ, ऐसी ही एक मकसद के लिए आया होता है—उसी काली हैवानी शक्ति के लिए। और जब उन्हें पता चलता है कि उन दोनों का मकसद एक ही है, और सेवक को उनकी टीम की जरूरत, तब उनका मकसद और समूह एक हो जाते हैं। पर अंदर ही अंदर हमेशा से सेवक का इरादा कुछ और ही होता है, एक बेहद ही खतरनाक मकसद जिससे सब अनजान होते है।

    उन दोनों समूहों का योजनाबद्ध मूल मकसद होता है—उस बुरी शक्ति को विधिअंतर्गत लाकर दीक्षा को उस दूसरी परिजीवी सत्ता से बचाना, फिर सिलीगुड़ी उस बुरी शक्ति को पूरी खत्म कर देना। इस दुनिया और सिलीगुड़ी के लोगों की भलाई के लिए। पर वही जुनून और बदले की आग में जलते सेवक की असल मंशा शुरुवात से ही कुछ और होती है — उनके साथ मिलकर उस बुरी शक्ति का खात्मा नहीं, बल्कि उसे वश में करके अपने गुस्से और जुनूनी बदले का एकमात्र और सबसे विनाशकारी हथियार बनाना, और उन असल हैवानो से बदला लेना, जो सरहद पार उसके सोच समझ और पहुंच से कोसों दूर हैं। उन इंसानी राक्षसों से, जिन्होंने उससे उसके इकलौते प्यार को छीना, और उसे हमेशा के लिए काले अंधेरे नर्क में झोंप दिया। और सेवक के इस मकसद में उसका साथ दे रहा होता है उसका छुपा हुआ साथी कबीर, जो खुद एक पछतावे की आग में झुलस रहा होता है। पछतावा, सेवक के प्यार शारमीन को गलत हाथों, यानी स्टेन के घिनौने साम्राज्य के हवाले कर देने और उसे न बचा पाने का।

    सिलीगुड़ी की इस काली और घातक योजना में, सभी अपने और अपने मकसद के लिए लड़ने और आगे बढ़ने के लिए तैयार होते है। लेकिन दोनों ही तरफ धोखा, साजिश, रणनीति, छल-कपट, छुपे हुए राज और सही मौके की तलाश चल रहें है। और किसी पे भी भरोसा नहीं किया जा सकता… खुद पे भी नहीं।

    इस कहानी के मूल बिंदु, केंद्र और सारांश, ये दो पक्ष, इनके किरदार, इनके मकसद, इनकी कहानियां और इनकी भूमिकाएं जरूर हैं, पर ये कहानी सिर्फ इनकी नहीं हैं। बल्कि उतनी ही उनकी भी हैं, जो इस डार्क साइकोलॉजिकल कहानी की असल नींव बने है, जिन्होंने इसे इस स्तर तक आगे बढ़ाया है। वो... जिन्होंने खुद तबाह होकर सिलीगुड़ी की शापित जमीन और उस काली नकारात्मक शक्ति को सींचा है।